जब पीएम मोदी भी खुद को रोक न पाए: बंगाल की ‘झालमुड़ी’ के इतने दीवाने क्यों हैं लोग?
News Image

पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। झाड़ग्राम में जनसभा के दौरान उन्होंने अचानक अपना काफिला रुकवाया और सड़क किनारे एक छोटे से ठेले पर जाकर बंगाल की मशहूर झालमुड़ी का स्वाद लिया। यह अनौपचारिक ठहराव महज एक स्नैक खाने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बंगाल की स्थानीय संस्कृति और आम जनमानस से जुड़ने का एक यादगार पल बन गया।

क्या है झालमुड़ी: नाम में छिपा स्वाद

बंगाली भाषा में झाल का अर्थ है तीखा और मुड़ी का मतलब है मुरमुरे (फूला हुआ चावल)। इन दोनों के मेल से बनती है तीखी और मसालेदार झालमुड़ी । यह पूर्वी भारत और बांग्लादेश के गली-कूचों की सबसे लोकप्रिय डिश है। इसमें सरसों का तेल, हरी मिर्च, प्याज, टमाटर, नींबू, धनिया और चनाचूर का ऐसा संतुलन होता है, जो इसे बंगाल की अड्डा संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाता है।

लोकल से ग्लोबल तक का सफर

कोलकाता की गलियों में घूमने वाले झालमुड़ीवाले अपने खास अंदाज के लिए जाने जाते हैं। वे पीतल के डिब्बों में जिस बिजली की गति से मसाले मिलाते हैं, वह किसी कला से कम नहीं है। कभी यह स्नैक सिर्फ आम आदमी की भूख मिटाने का जरिया था, लेकिन आज यह बंगाल की सांस्कृतिक विरासत बन चुका है। कोलकाता आने वाले पर्यटकों की मस्ट-डू लिस्ट में झालमुड़ी का नाम सबसे ऊपर होता है।

स्वाद का राज: असली बंगालियत

झालमुड़ी की सादगी में ही इसका स्वाद छिपा है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है सरसों का तेल । इसकी तीखी खुशबू और तासीर ही झालमुड़ी को बाकी सभी मुरमुरे स्नैक्स से अलग करती है। मूंगफली और उबले आलू का तड़का इसे और भी खास बना देता है।

मुंबई की भेलपुरी और बंगाल की झालमुड़ी में क्या अंतर है?

पहली नजर में दोनों एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन स्वाद में जमीन-आसमान का फर्क है। मुंबई की भेलपुरी मीठी-खट्टी चटनी, इमली और सेव के कारण थोड़ी नम और मीठे फ्लेवर वाली होती है। वहीं, झालमुड़ी का मिजाज पूरी तरह से मसालेदार, सूखा और तीखा होता है। जहां भेलपुरी एक चाट का अनुभव है, वहीं झालमुड़ी एक मसालेदार ड्राई स्नैक है।

क्षेत्रीय विविधता का प्रतीक

भारत के हर कोने में मुरमुरे के अपने-अपने रंग हैं। जहां कर्नाटक में इसे चुरुमुरी के नाम से जाना जाता है, जिसमें नींबू और नारियल तेल का इस्तेमाल होता है, वहीं बंगाल की झालमुड़ी सरसों के तेल की खुशबू से महकती है और मुंबई की भेलपुरी अपनी चटनी के लिए मशहूर है।

ये व्यंजन महज खाद्य पदार्थ नहीं हैं, बल्कि यह भारत की खाद्य विविधता और सादगीपूर्ण संस्कृति को बयां करते हैं। झालमुड़ी ने साबित कर दिया है कि बड़े से बड़े पद पर बैठा व्यक्ति भी स्थानीय स्वाद और माटी की खुशबू के आगे खुद को रोक नहीं पाता।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

IPL 2026: KKR से हार के बाद मैदान पर फूट-फूटकर रो पड़े वैभव सूर्यवंशी, वीडियो वायरल

Story 1

66 की उम्र में डिलीवरी पार्टनर बने रिटायर्ड क्लर्क: रिटायरमेंट के बाद अनोखे शौक ने दुनिया को किया हैरान

Story 1

# लेंसकार्ट शोरूम में बवाल: बीजेपी नेता नाजिया इलाही का स्टाफ से तीखा सवाल- क्या यहाँ शरिया लागू करना है?

Story 1

बक्सर के स्कूल में गर्मी का तांडव: एक साथ 10 बच्चे हुए बेहोश, मचा हड़कंप

Story 1

उधमपुर में भीषण सड़क हादसा: अनियंत्रित बस 100 फीट गहरी खाई में गिरी, 21 लोगों की मौत

Story 1

डिजिटल जनगणना 2027: छत्तीसगढ़ में स्व-गणना को जबरदस्त रिस्पॉन्स, अब तक 26 हजार से ज्यादा नागरिक जुड़े

Story 1

ओमान की खाड़ी में युद्ध की आहट: अमेरिकी हमले का ईरान ने दिया करारा जवाब, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद

Story 1

बीच सड़क थार से खौफनाक स्टंट: पुलिसवाले ने भागकर बचाई जान, रईसजादे की दबंगई देख कांप उठे लोग!

Story 1

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा अब मुफ्त नहीं: ईरान की अमेरिका को दो टूक चेतावनी

Story 1

सुपौल में जमीन के लिए खूनी खेल: आधी रात को घर में घुसकर युवक को मारी गोली