दुनिया देखती रह गई, इजरायल ने बदल दिया नक्शा: सीजफायर की आड़ में बनाया बफर जोन !
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नई दिल्ली/तेल अवीव: वैश्विक राजनीति का ध्यान इस समय इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं पर टिका है। लेकिन इसी बीच मिडिल ईस्ट में इजरायल ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे अरब जगत को सन्न कर दिया है। संघर्षविराम (सीजफायर) की आड़ में इजरायली सेना (IDF) ने लेबनान की सरहद के भीतर घुसकर नया नक्शा जारी कर दिया है।

5 से 10 किलोमीटर अंदर तक कब्जा

इजरायली सेना द्वारा जारी किए गए नए नक्शे के अनुसार, IDF ने अपनी डिप्लॉयमेंट लाइन को अंतरराष्ट्रीय सीमा से आगे बढ़ाकर लेबनान के भीतर 5 से 10 किलोमीटर तक स्थापित कर लिया है। लेबनान जैसे छोटे देश के लिए यह क्षेत्रफल बहुत बड़ा है। अब इन इलाकों में लेबनानी नागरिकों की जगह इजरायली टैंक और सैनिक गश्त कर रहे हैं।

खंडहर बन चुके गांवों पर इजरायली नियंत्रण

जिन इलाकों को इजरायल ने अपने नियंत्रण में लिया है, वे कभी आबाद गांव हुआ करते थे। महीनों की बमबारी के बाद ये जगहें अब खंडहर बन चुकी हैं। स्थानीय लोग जान बचाकर उत्तर की ओर पलायन कर चुके हैं। इजरायल ने इन खाली पड़े क्षेत्रों को अब अपनी सैन्य चौकी में तब्दील कर दिया है, जहां से वह हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर सीधी नजर रख रहा है।

सीजफायर की नई परिभाषा

आमतौर पर संघर्षविराम का अर्थ सेनाओं की वापसी होता है, लेकिन इजरायल ने इस बार अपनी सेना को पीछे हटाने के बजाय आगे बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि एक व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है। एक तरफ जहां बंद कमरों में शांति की बातें हो रही हैं, दूसरी तरफ इजरायल जमीनी हकीकत को अपने पक्ष में बदल रहा है।

सुरक्षा या विस्तारवाद?

इजरायल का स्पष्ट कहना है कि यह 10 किलोमीटर का इलाका उसके लिए एक बफर जोन है। उसका तर्क है कि उत्तरी इजरायल की सुरक्षा के लिए यह अनिवार्य है ताकि हिजबुल्लाह के रॉकेट और मिसाइल हमलों को रोका जा सके। इजरायली सरकार का दावा है कि जब तक यह सुरक्षा घेरा पूरी तरह मजबूत नहीं हो जाता, तब तक विस्थापित नागरिकों की घर वापसी संभव नहीं है।

अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बड़ा खेल

इस घटनाक्रम को अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक हलचल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मिडिल ईस्ट के जानकारों का मानना है कि जेडी वेंस जैसे नेताओं की सक्रियता के बीच इजरायल ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करके यह संदेश दिया है कि शांति समझौता हो या न हो, अपनी सुरक्षा की नई सीमाएं वह खुद तय करेगा। लेबनान ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह कदम आने वाले दिनों में नए तनाव को जन्म दे सकता है।

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