दिल्ली के इस्लामिक कल्चर सेंटर में रविवार को एक विशेष शोक सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर रहमतुल्लाह खामेनेई की पुण्यतिथि के 40 दिन पूरे होने पर आयोजित किया गया था। इस सभा में न केवल शिया समुदाय बल्कि विभिन्न धर्मों और विचारधाराओं के प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया।
अमेरिका पर साधा निशाना कार्यक्रम में भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अमेरिका की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान कभी बातचीत से पीछे नहीं हटा, लेकिन अमेरिकी प्रशासन की नीयत साफ नहीं थी। उनके अनुसार, अमेरिका केवल समय बर्बाद करना चाहता था और अपनी अनंत मांगें थोप रहा था, जिसके कारण बातचीत विफल रही।
हम पर थोपा गया युद्ध डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध का समर्थक नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, यह युद्ध हमारे ऊपर थोपा गया है। हमने केवल अपनी रक्षा की है और हम अपनी गरिमा, अधिकारों और देश के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। हम अगले कई वर्षों तक अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
हॉर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का रुख हॉर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर डॉ. इलाही ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह मार्ग केवल अमेरिका का नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि अमेरिकी जहाज खाड़ी में क्या कर रहे हैं और उन्हें वहां से हट जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ईरान इस मार्ग पर सभी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है, बशर्ते बाहरी हस्तक्षेप बंद हो।
भारत शांति की धरती कार्यक्रम में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने खामेनेई को एक महान आध्यात्मिक नेता बताया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है और बुद्ध की धरती होने के नाते हम युद्ध के खिलाफ हैं। नकवी के अनुसार, विस्तारवाद विनाश लाता है, जबकि संवाद ही समस्याओं का एकमात्र समाधान है।
इंसाफ और इंसानियत का संदेश पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी इस मौके पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह समय खामेनेई द्वारा दिखाए गए रास्तों पर विचार करने का है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कूटनीतिक बातचीत के जरिए क्षेत्र में अमन और शांति बहाल होगी। इस शोक सभा ने दुनिया को यह संदेश दिया कि न्याय और संप्रभुता के लिए खड़ा होना कितना महत्वपूर्ण है।
#WATCH | Delhi | On failed US-Iran talks, Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi, Representative of Iran’s Supreme Leader in India, says, From the beginning, we were doubtful of these negotiations, because we are sure that the American administration is not serious about it. They wanted to… pic.twitter.com/ClTwhTFZ55
— ANI (@ANI) April 12, 2026
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