होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान का शक्ति प्रदर्शन , युद्धपोतों की आवाजाही पर आर-पार
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होर्मुज में बढ़ी तनातनी मिडिल ईस्ट के सबसे रणनीतिक समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी सैन्य कमान (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसके दो युद्धपोत—यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी—सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर अरब खाड़ी में तैनात हो गए हैं।

मिशन का मकसद: बारूदी सुरंगों की सफाई अमेरिका का कहना है कि यह तैनाती एक व्यापक मिशन का हिस्सा है। पेंटागन के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस इलाके में बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं। अमेरिका इन सुरंगों को हटाकर समुद्री व्यापार मार्ग को सुरक्षित बनाना चाहता है। युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार अमेरिकी युद्धपोतों का इस तरह गुजरना बड़ी कूटनीतिक हलचल पैदा कर रहा है।

ईरान ने दावों को किया खारिज ईरान ने अमेरिका के इस दावे को सिरे से नकार दिया है। ईरानी सेना के खातम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि अमेरिकी बयान पूरी तरह झूठ है। ईरान का तर्क है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी जहाज की आवाजाही का नियंत्रण केवल तेहरान के पास है और बिना उनकी अनुमति के कोई भी सैन्य जहाज वहां से नहीं गुजर सकता।

IRGC की खुली चेतावनी दावों के खंडन के साथ, IRGC ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि यदि कोई भी सैन्य जहाज बिना अनुमति के इस जलमार्ग का उपयोग करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी। इससे क्षेत्र में सुरक्षा हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं।

होर्मुज क्यों है वैश्विक अर्थव्यवस्था की धमनी ? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस की करीब 20% सप्लाई होती है। फरवरी में इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने इस जलमार्ग को लगभग बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू गई थीं। अमेरिकी एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, अब अमेरिका इस इलाके में एक सुरक्षित समुद्री मार्ग बहाल करने की कोशिश कर रहा है।

शांति वार्ता की राह में रोड़ा? यह टकराव ऐसे नाजुक समय में हुआ है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल सीजफायर और अन्य शर्तों पर बातचीत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती यह सैन्य तनातनी चल रही शांति प्रक्रिया को पटरी से उतार सकती है और क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।

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