खाड़ी में जयशंकर का मास्टरस्ट्रोक : UAE दौरे से पाकिस्तान में क्यों बढ़ी बेचैनी?
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नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम के बाद मध्य-पूर्व (Middle East) की स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का 11-12 अप्रैल 2026 को होने वाला संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा भारत की कैलकुलेटेड कूटनीति को दर्शाता है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली सीजफायर की कोशिशें लगभग विफल होती दिख रही हैं।

होर्मुज स्ट्रेट और एनर्जी सिक्योरिटी पर फोकस

भारत के लिए यह दौरा सिर्फ एक सामान्य राजनयिक यात्रा नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस समय एनर्जी सिक्योरिटी को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानकर चल रहा है। होर्मुज स्ट्रेट, जो भारत के तेल आयात की लाइफलाइन है, उसे सुरक्षित रखने के लिए भारत लगातार सक्रिय है। एक तरफ जयशंकर यूएई जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कतर भेजे गए हैं।

डिफेंस पार्टनरशिप: आकाश मिसाइल पर चर्चा?

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में व्यापक रणनीतिक भागीदारी पर जोर दिया जाएगा। चर्चा है कि भारत यूएई को आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम देने की पेशकश पर बातचीत को आगे बढ़ा सकता है। यदि यह डील होती है, तो यह दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय होगा।

पाकिस्तान के लिए बढ़ा तनाव

यूएई की ओर से पाकिस्तान पर 3.5 बिलियन डॉलर का कर्ज वापस करने का दबाव बढ़ गया है। पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में इसे भारत और यूएई के बीच गहराते रिश्तों का परिणाम माना जा रहा है। पाकिस्तानी सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने तंज कसते हुए कहा है कि यूएई की आबादी में 43 लाख भारतीय हैं, और भारत-यूएई की बढ़ती दोस्ती कहीं पाकिस्तान के लिए भविष्य में और मुश्किलें न खड़ी कर दे।

भरोसे का संकट और बदलती समीकरण

यूएई और पाकिस्तान के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि सऊदी अरब के साथ हुए डिफ़ेंस पैक्ट के बावजूद पाकिस्तान के उदासीन रवैये के कारण अरब देशों का भरोसा पाकिस्तान से उठा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जाएद अल नहयान की घनिष्ठता ने नई साझेदारी को मजबूत किया है।

100 अरब डॉलर के पार व्यापार

यूएई अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच रुपये और दिरहम में व्यापार ने डॉलर की निर्भरता को कम किया है। 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। जयशंकर का यह दौरा उस समय हो रहा है जब भारत अमेरिका के साथ भी वैश्विक सहयोग और रक्षा पर गहन वार्ता करने की तैयारी में है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती धमक को साबित करता है।

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