मध्यप्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कैबिनेट बैठक में अधिकारियों और मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि जिन राज्यों में UCC लागू हो चुका है, उनके मॉडल का गहन अध्ययन किया जाए। सरकार इसे समाज में समानता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रही है।
सरकार की तैयारी और समानता का तर्क कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि इसे महज चर्चा तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि एक समान कानून से समाज में समरसता बढ़ेगी। इसे लागू करने के लिए अन्य राज्यों के अनुभवों को खंगाला जा रहा है, ताकि प्रदेश की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप एक ठोस प्रारूप तैयार किया जा सके।
कांग्रेस का हमला: मूलभूत मुद्दों से ध्यान भटकाने की चाल सरकार के इस फैसले पर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने तीखे सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति बताया है। मसूद का कहना है कि प्रदेश की जनता फिलहाल गैस की किल्लत और खाद की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन बुनियादी समस्याओं से पल्ला झाड़ने के लिए UCC जैसे संवेदनशील मुद्दों को हवा दे रही है।
भाजपा का पलटवार: समान अधिकार के लिए समान कानून जरूरी दूसरी ओर, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने मुख्यमंत्री के कदम की जोरदार वकालत की है। उन्होंने कहा कि देश में जब शिक्षा, रोजगार और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सबको समान चाहिए, तो कानून भी सबके लिए एक होना चाहिए। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण का हवाला देते हुए इसे प्रदेश और देश की प्रगति के लिए अनिवार्य बताया और जल्द से जल्द बिल लाने की मांग की।
क्या है रुबीना खाना इकबाल मामला? इस राजनीतिक शोर के बीच रुबीना खाना इकबाल मामले पर भी बहस छिड़ गई है। आरिफ मसूद ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समाज में आपसी सौहार्द बिगड़ने वाले शब्दों से बचना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा कि वंदे मातरम का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन उसे अनिवार्य नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में कांग्रेस पार्टी से एक जांच कमेटी गठित करने की मांग भी की है।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी रस्साकशी UCC को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शुरू हुआ यह घमासान थमने वाला नहीं है। जहां एक ओर बीजेपी इसे साहसिक और प्रगतिशील कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे लफ्फाजी करार दे रही है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार कब तक इसका ड्राफ्ट तैयार करती है और इसे लेकर जमीन पर क्या प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
UCC मध्यप्रदेश सहित पूरे देश की मांग है... pic.twitter.com/dspGNjkGsG
— Rameshwar Sharma (@rameshwar4111) April 8, 2026
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