शहबाज शरीफ की ड्राफ्ट वाली चूक: क्या ईरान को मिली मोहलत अमेरिका की सोची-समझी चाल थी?
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों वैश्विक राजनीति के गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मंगलवार को शरीफ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक संदेश पोस्ट किया, जिसमें गलती से ड्राफ्ट शब्द भी लिखा रह गया। इस चूक ने यह राज खोल दिया है कि यह अंतरराष्ट्रीय संदेश खुद पीएम कार्यालय में नहीं, बल्कि कहीं और तैयार हुआ था।

व्हाइट हाउस की क्लीन चिट के बाद हुआ ट्वीट रिपोर्ट्स के अनुसार, शहबाज शरीफ ने यह संदेश पोस्ट करने से पहले इसे व्हाइट हाउस भेजा था। अमेरिका से हरी झंडी मिलने के बाद ही इसे सार्वजनिक किया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि पर्दे के पीछे अमेरिका और पाकिस्तान के बीच डिप्लोमैटिक चैनल बेहद सक्रिय थे। हालांकि, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि यह मैसेज सीधे डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा था, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह एक स्पॉन्सर्ड कूटनीतिक कदम था।

ट्रंप की भाषा और दो हफ्ते की मोहलत शरीफ ने अपने पोस्ट में ट्रंप की शैली का अनुकरण करते हुए मजबूती और पावर वाली कूटनीति की बात की थी। उन्होंने ईरान को दी गई ट्रंप की सख्त डेडलाइन को दो हफ्ते आगे बढ़ाने की अपील की थी। मजे की बात यह है कि शरीफ के ट्वीट के कुछ ही घंटों बाद, ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) पर अपनी सहमति जता दी।

सीजफायर के नाम पर छिपी खींचतान भले ही युद्ध दो हफ्ते के लिए रुक गया हो, लेकिन जमीन पर तनाव जस का तस है। अमेरिका और ईरान दोनों ही समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी इजरायली हमलों को लेकर स्थिति अब भी अस्पष्ट है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कर दिया है कि वॉशिंगटन ने लेबनान में लड़ाई रोकने का कोई वादा नहीं किया था। वहीं, ईरान का कहना है कि ड्रोन घुसपैठ और हिजबुल्लाह पर हमले सीजफायर का सीधा उल्लंघन हैं।

इस्लामाबाद बनेगा बातचीत का नया केंद्र तनाव को थामने के लिए अब शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक उच्च-स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस करेंगे। ईरानी टीम गुरुवार को ही इस्लामाबाद पहुंच रही है। ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने इस बार समझौते की शर्तें नहीं मानीं, तो दुनिया ऐसी कड़ी कार्रवाई देखेगी जैसी पहले कभी नहीं हुई। अब सबकी नजरें इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हैं।

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