जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी को उम्रकैद, 20 साल बाद पलटा निचली अदालत का फैसला
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

क्लीन चिट को हाई कोर्ट ने माना गलत चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को दी गई क्लीन चिट कानूनी तौर पर गलत थी। कोर्ट ने तर्क दिया कि जब उन्हीं सबूतों के आधार पर अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी, तो मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना न्यायसंगत नहीं था।

क्या था मामला? 4 जून 2003 को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता रामअवतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया था। पुलिस ने मामले में 31 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 2007 में 28 लोगों को दोषी पाया गया, लेकिन अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

लंबे संघर्ष के बाद आया फैसला रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने हार नहीं मानी और कानूनी लड़ाई जारी रखी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, जिसके बाद हाई कोर्ट ने इस केस को दोबारा खोला। अमित जोगी के साथ ही याह्या ढेबर, अभय गोयल, फिरोज सिद्दीकी, वीके पांडे और चिमन सिंह जैसे अन्य आरोपियों की सजा को भी कोर्ट ने बरकरार रखा है।

अमित जोगी बोले- ये अन्याय है सजा के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि हाई कोर्ट ने उनकी बात सुने बिना ही महज 40 मिनट में फैसला सुना दिया। उन्होंने इसे अपने साथ अन्याय बताते हुए कहा है कि उन्हें पहले बरी किया गया था और अब बिना सुनवाई का मौका दिए दोषी ठहरा दिया गया। अमित जोगी की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर कर दी है।

सतीश जग्गी ने कहा- आखिरकार न्याय मिला दूसरी ओर, रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, यह मेरे परिवार की 20 साल की तपस्या का फल है। हालांकि हम अपने पिता को खोने के गम से पूरी तरह नहीं उबर सकते, लेकिन न्यायपालिका ने यह साबित कर दिया है कि सच की जीत हमेशा होती है।

फिलहाल, हाई कोर्ट ने अमित जोगी को सरेंडर करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है। राज्य की राजनीति में इस फैसले के बाद एक बार फिर गरमाहट आ गई है।

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