सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि भारत ने ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने तेल टैंकरों को निकालने के लिए अमेरिकी डॉलर के बजाय चीनी मुद्रा युआन में पेमेंट किया है। इस खबर ने वैश्विक वित्त बाजार में हलचल मचा दी है।
क्या है वायरल दावा? दावा किया जा रहा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए 20 लाख डॉलर का टैक्स या शुल्क अनिवार्य कर दिया है और यह भुगतान केवल चाइनीज युआन में ही स्वीकार किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय झंडे वाले 22 जहाज, जिनमें 17 लाख टन कच्चा तेल और गैस लदी है, वहां फंसे हुए हैं।
विदेश मंत्रालय का रुख: खबर पूरी तरह फेक भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस पूरे दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय की फैक्ट-चेक इकाई ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि भारत द्वारा युआन में पेमेंट करने की खबरें पूरी तरह से आधारहीन और गलत हैं। सरकार ने लोगों से ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करने की अपील की है।
ईरान-चीन और पेट्रोडॉलर का कनेक्शन ईरान, जो लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, उसने पहले भी डॉलर को चुनौती देने की बात कही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि वे कुछ चुनिंदा व्यापारों के लिए युआन स्वीकार कर सकते हैं। यह कदम अमेरिका के पेट्रोडॉलर सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत की कूटनीति: ईरान के साथ लगातार संपर्क भले ही भुगतान को लेकर दावे गलत हैं, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में फंसे तेल टैंकरों और क्षेत्रीय शांति को लेकर भारत बहुत सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार ईरानी नेतृत्व के संपर्क में हैं। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अरागची के साथ बातचीत कर क्षेत्र में जारी तनाव पर चिंता जताई और स्थिति को सामान्य करने पर जोर दिया है।
भारत की नो एनिमी पॉलिसी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कूटनीति इस समय एक नाजुक संतुलन पर टिकी है। भारत के संबंध ईरान, इजरायल, अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ व्यक्तिगत तौर पर मजबूत हैं। सोशल मीडिया पर एक वर्ग का यह भी कहना है कि इन देशों के बीच चल रहे विवाद में भारत का कोई दुश्मन नहीं है, जो भारत की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है।
पेट्रोडॉलर पर संकट के बादल? वैश्विक स्तर पर आंकड़ों को देखें तो 2022 के बाद से OPEC देशों के राजस्व में गिरावट आई है। हालांकि, डॉलर अभी भी वैश्विक व्यापार की मुख्य मुद्रा बना हुआ है, लेकिन चीन और रूस जैसे देश अपने व्यापार में डॉलर की निर्भरता कम करने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल भारतीय विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि भारत ने ऐसी किसी भी वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनने का फैसला नहीं लिया है।
Fake News Alert!
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) March 19, 2026
Please stay alert against such false and baseless claims and posts on social media! pic.twitter.com/3PwAaWp9Bu
पेट्रोल शॉर्टेज लीग : आइसलैंड क्रिकेट ने PSL की उड़ाई धज्जियां, टूर्नामेंट पर मंडराया संकट
बजट में दिल्ली नंबर वन, पर नींव है अभी भी कमजोर; शिक्षा पर खर्च का सच
न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा: टैक्सी कर रहे विमान की फायर ट्रक से टक्कर, मचा हड़कंप
मंच पर फूट-फूटकर रोए संजय निषाद: क्या BJP से टूट रहा है साथ? सामने आया बड़ा सच
क्या 60 की उम्र तक IPL खेलेंगे एमएस धोनी? माही के जवाब ने फैंस को किया रोमांचित
मैदान पर उतरे माही तो आंसुओं में डूबी फैन, क्या ये है एमएस धोनी का आखिरी IPL?
मथुरा बवाल: फरसा वाले बाबा की मौत के बाद हिंसा भड़काने वाले 20 गिरफ्तार, 80 की पहचान
टेस्ट या टी20? नितीश रेड्डी के जवाब ने ईशान किशन को भी कर दिया हैरान!
पटना यूनिवर्सिटी में पोस्टर वॉर : मनुस्मृति दहन के बाद कैंपस की दीवारों पर भड़काऊ नारों का कब्ज़ा
26 की उम्र में बने करोड़पति, लग्जरी कारें छोड़ क्यों चुनी सादगी वाली अमीरी ?