पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को लेकर आम जनता में चिंता बढ़ गई है। संसद में इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहम बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वैश्विक तनाव के बावजूद सरकार देश में ईंधन की कीमतों और सप्लाई को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
सप्लाई चेन पर सरकार की पैनी नजर पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आयात करता है। युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे कच्चा तेल और फर्टिलाइजर की सप्लाई पर दबाव है। हालांकि, सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में है ताकि देश के भीतर तेल और गैस की कोई कमी न हो।
आयात के स्रोतों में बड़ा बदलाव प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी निर्भरता कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। अब भारत केवल कुछ देशों पर निर्भर रहने के बजाय 27 की जगह 41 देशों से तेल आयात कर रहा है। इसके अलावा, देश में 65 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आपातकालीन रिजर्व तैयार किया जा रहा है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में आम जनता को परेशानी न हो।
क्या आम आदमी पर पड़ेगा महंगाई का बोझ? पीएम मोदी के संबोधन से साफ संकेत मिलते हैं कि सरकार फिलहाल पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कोई जल्दबाजी में नहीं है। सरकार की प्राथमिकता सप्लाई चेन को निर्बाध रखना है। सरकार ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो रोजाना आयात-निर्यात और बाजार की स्थिति की समीक्षा कर रही है।
विदेशों में फंसे भारतीय सुरक्षित ऊर्जा संकट के साथ-साथ पीएम ने भारतीयों की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने जानकारी दी कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। इसमें ईरान से वापस आए करीब 1,000 भारतीय भी शामिल हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र हैं।
निष्कर्ष: स्थिति चुनौतीपूर्ण, पर नियंत्रण में सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। लेकिन, घरेलू स्तर पर एलपीजी का 60 प्रतिशत उत्पादन भारत खुद कर रहा है और आयात के नए रास्ते तलाशने से स्थिति नियंत्रण में है। फिलहाल, सरकार की पूरी कोशिश है कि इस अंतरराष्ट्रीय संकट का बोझ आम आदमी की जेब पर न पड़े।
#WATCH | On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, Since the war began, more than 3,75,000 Indians have returned safely to India. From Iran, nearly 1,000 Indians have returned safely so far, of which over 700 are medical students. In view of the situation,… pic.twitter.com/laIMJ2KDjX
— ANI (@ANI) March 23, 2026
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