चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। यानी जो तप का आचरण करती हैं, वे ब्रह्मचारिणी हैं। मां ब्रह्मचारिणी की साधना से भक्त में धैर्य, संयम और ज्ञान की वृद्धि होती है।
नवरात्रि के दूसरे दिन एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का प्रभाव रहेगा, जो किसी भी नए कार्य की शुरुआत या मंत्र जाप के लिए दोषमुक्त माना जाता है। इसके अलावा, शुक्रवार को अमृत सिद्धि योग भी रहेगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे राहुकाल (सुबह 10:58 से 12:29 तक) और यमगंड जैसे अशुभ समय में पूजा से बचें।
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माता के समक्ष बैठकर उन्हें पुष्प, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें। मां ब्रह्मचारिणी को विशेष रूप से दूध, दही, घी, शहद और शर्करा (चीनी) से स्नान कराना अत्यंत शुभ माना जाता है।
ध्यान मंत्र: दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू। देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
पूजा के दौरान उन्हें पान, सुपारी और लौंग अर्पित करें। अंत में उनकी आरती उतारें और अपनी मनोकामना व्यक्त करें।
मां ब्रह्मचारिणी को भोग में शर्करा यानी गुड़ या चीनी से बनी मिठाई चढ़ाना श्रेष्ठ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से साधक को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप प्रेरणा देता है कि जीवन में बिना कठोर परिश्रम और तपस्या के सफलता प्राप्त करना असंभव है।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, माता ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। इस दौरान उन्होंने फल-फूल और अंत में सूखे बिल्व पत्र खाना भी त्याग दिया था, जिसके कारण उन्हें अपर्णा भी कहा गया। उनकी कठोर तपस्या से प्रभावित होकर ही उन्हें शिव जी की प्राप्ति हुई थी। यह कथा हमें सिखाती है कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए अटूट संकल्प कितना आवश्यक है।
आरती करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आरती 1, 5 या 7 (विषम संख्या) बत्तियों वाली होनी चाहिए। आरती को 14 बार उतारें: चार बार चरणों पर, दो बार नाभि पर, एक बार मुख पर और सात बार पूरे शरीर पर।
पूजा सामग्री सूची: मां की प्रतिमा के अलावा सिंदूर, केसर, कपूर, धूप, आम के पत्ते, दूर्वा, बेलपत्र, कमल गट्टा, लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान पूजा में विशेष रूप से शामिल करें।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा का विधान है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुराणों में इनका क्या महत्व है? आइए, इस वीडियो में जानें!#HappyNavratri #AmritMahotsav pic.twitter.com/kbel6BTa1A
— Ministry of Culture (@MinOfCultureGoI) October 4, 2024
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