मोसाद का ऑपरेशन ए ड्रॉप ऑफ लक : एक झटके में खत्म हुई हूती सरकार!
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यमन में इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने एक दुस्साहसिक ऑपरेशन को अंजाम दिया है, जिसमें हूती सरकार के प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख समेत कई वरिष्ठ मंत्रियों को मार गिराया गया है। इस ऑपरेशन को इजरायल की खुफिया एजेंसी का सबसे बड़ा ऑपरेशन माना जा रहा है।

इजरायल ने हूती के प्रधानमंत्री अल-रहावी, रक्षा मंत्री मुहम्मद नासिर अल-अथाफी और सेना प्रमुख मुहम्मद अल-ग़ामरी को एक साथ मार गिराया। इसके साथ ही हूती सरकार के कम से कम 10 मंत्रियों के भी मारे जाने की सूचना है।

गृहयुद्ध की मार झेल रहे यमन में हूती सबसे मजबूत गुट है। हूती नेता लाल सागर में जहाजों पर हमले की योजना बनाते थे। इजरायल ने सना में हूती नेताओं पर हमला करके उनके दिमाग को ही खत्म कर दिया है।

यह ऑपरेशन कैसे अंजाम दिया गया, इसको लेकर कई सवाल उठ रहे थे। हूती के सबसे बड़े चेहरे कड़ी सुरक्षा में रहते थे, तो वे अचानक एक जगह कैसे इकट्ठे हुए? मोसाद ने उनकी लोकेशन कैसे ट्रेस की? और कैसे सटीक हमला किया गया?

खबरों के अनुसार, हूती प्रधानमंत्री अल-रहावी सरकार के दूसरे मंत्रियों के साथ एक अपार्टमेंट में मौजूद थे। वे सभी टीवी पर हूती चीफ अल-मलिक हूती का संदेश सुनने का प्लान बना रहे थे। तभी इजरायल के एफ 35 लड़ाकू विमानों ने अपार्टमेंट पर हमला किया।

उसी समय, इजरायल का हारोप आत्मघाती ड्रोन सना के आसमान में मंडरा रहा था। उसका टारगेट हूती रक्षा मंत्री अल अथिफी और हूती चीफ आफ स्टाफ मुहम्मद अल-ग़ामरी थे, जो एक दूसरे अपार्टमेंट में अपने लीडर का प्रसारण सुन रहे थे। जैसे ही यह कन्फर्म हुआ कि टॉप डिफेंस मिनिस्टर और चीफ ऑफ स्टाफ एक अपार्टमेंट में बैठे हैं, उसी लोकेशन को भी निशाना बनाया गया।

मोसाद ने इस बार अपने दुश्मनों को पता लगाने के लिए बिल्कुल नई तकनीक का इस्तेमाल किया। मोसाद ने यमन में पहले से ही स्थानीय जासूसों का जाल बिछा रखा है। इन एजेंट्स ने पता लगाया कि हूती प्रमुख के संबोधन को सुनने के लिए हूती की टॉप लीडरशिप इकट्ठी हो रही है।

इजरायल का एइताम स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट, जिसे फ्लाइंग मोसाद भी कहा जाता है, यमन के आसमान में मंडराने लगा। ये विमान आसमान की ऊंचाइयों से रेडियो, सैटेलाइट, मोबाइल नेटवर्क, राडार और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के सिग्नल्स को इंटरसेप्ट कर सकता है।

हूती की टॉप लीडरशिप जब अब्दुल-मलिक अल-हूती का भाषण सुनने के लिए अलग-अलग जगहों पर इकट्ठी हुई, तो उनके मोबाइल फोन, सैटेलाइट फोन और इंटरनल नेटवर्क पर एक्टिविटी अचानक बढ़ गई। मोसाद ने इस पैटर्न को पकड़ लिया।

हूती के हर मंत्री और सैन्य कमांडर के पास सुरक्षित कम्युनिकेशन डिवाइस होता है, जिसका डिजिटल फिंगरप्रिंट पहले से ही इजरायली डेटाबेस में मौजूद था। हूती कमांडरों के मोबाइल फोन का IMEI नंबर, उसमें पड़े सिम का यूनिक ID, ईमेल डिवाइस का आईपी एड्रेस, ये पूरी जानकारी मोसाद के डेटाबेस में मौजूद थी।

जैसे ही इन लोगों ने अपने फोन या टैबलेट खोले, मोसाद को फौरन सिग्नल मिल गया कि हूती सरकार के प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, चीफ आफ स्टाफ और दूसरे मंत्रियों की लोकेशन क्या है। ये जानकारी फौरन आसमान में उड़ रहे एइताम विमानों ने इजरायल तक भेज दी, जिसके बाद फाइटर जेट्स और फिदायीन ड्रोन्स को टारगेट की लोकेशन भेजी गई।

हूती के पास ईरान से मिले एयर डिफेंस सिस्टम हैं। इनसे बचने के लिए इजरायल ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैमिंग की, जिससे हूती रडार ब्लाइंड हो गए। दोनों हमले लगभग एक साथ किए गए, ताकि हूती नेतृत्व को रिस्पॉन्स टाइम न मिले।

इजरायल ने इस हमले को सिर्फ एयरस्ट्राइक नहीं बल्कि इंटेलिजेंस मास्टरपीस बताया है। इस हमले के जरिए मोसाद और इजरायल की वायुसेना ने दिखा दिया कि हूती चाहे 1800 किलोमीटर दूर हों, चाहे उनके पास ईरान की सुरक्षा हो, वो कहीं भी छिपे हों, मोसाद उनको तलाश करके खत्म कर देगी।

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