सीतापुर के नारनी महोली क्षेत्र के कई गांव सुनसान पड़े हैं। सूरज ढलते ही डर का माहौल छा जाता है। सुबह जरूर शांति देती है, लेकिन पाबंदियों के साथ ही जिंदगी सुरक्षित लगती है। यह डर किसी गुंडे की बंदूक का नहीं, बल्कि बाघ की दहाड़ का है।
दुधवा टाइगर रिजर्व की मोहम्मदपुर रेंज से एक बाघ निकलकर लखीमपुर से सीतापुर के ग्रामीण इलाके में आ गया है। बाघ के इंसानी बस्तियों में ठिकाना बना लेने से लोगों की जान खतरे में है। दुधवा टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में बाघों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन बारिश होते ही बाघ जंगलों से कई किलोमीटर दूर रिहायशी इलाकों में चले आते हैं।
इसके पीछे कई कारण हैं। कई बार बाघ अपने समूह में क्षेत्रीय विवाद के चलते जंगलों से बाहर निकल आते हैं। जंगलों में बारिश के चलते शिकार में दिक्कत होने पर बाघ अक्सर रिहायशी इलाकों की तरफ चले आते हैं।
सीतापुर का महोली इलाका इसी डर का शिकार है। पिछले कई महीनों से बाघ का मूवमेंट इस इलाके में बना हुआ है। बाघ ने हाल ही में खेतों में काम कर रहे एक युवक पर हमला कर उसकी जान ले ली। यह बाघ दिन के उजाले में खेतों में घूमता है और रात के अंधेरे में शिकार करता है।
गांव वालों का कहना है कि यह बाघ लंबे समय से यहां है। पहले नीलगाय और जंगली सुअर पर हमले होते थे, लेकिन अब बाघ ने उनके गांव के युवक को शिकार बनाया है। वन विभाग के अधिकारियों के लिए जंगल में बाघों को खदेड़ना और लोगों को सुरक्षित करना बड़ी चुनौती है।
वन विभाग कई दिनों से इस इलाके में डेरा डाले हुए है। आठ-आठ लोगों की टीम गांवों में बाघ के मूवमेंट पर नजर रख रही है। गांव की आबादी में कैमरे लगाए गए हैं और जगह-जगह खेतों में पिंजड़े लगाए गए हैं। वन विभाग की कोशिश है कि बाघ को वापस दुधवा की तरफ भेजा जाए।
महोली इलाके के कई गांवों में डर का माहौल है। कई जगह दहशत को दूर करने के लिए लोग रात को गश्त कर रहे हैं। बाघ के डर से बच्चों को आंगन में आने की इजाजत नहीं है और उन्हें बंद करके रखा जाता है। पिछले दस दिनों से कोई बच्चा स्कूल नहीं गया है।
गांवों की तरफ बाघ की चहलकदमी से गांव वालों में खौफ है और खेती को भी नुकसान हो रहा है। किसान झुंड बनाकर और हाथों में लाठियां लेकर गन्ने की देखरेख कर रहे हैं, जिससे फसल का नुकसान हो रहा है।
लखनऊ के रहमान खेड़ा इलाके में भी तेंदुए की दहशत है। दो दिन पहले तेंदुए ने मीठा नगर गांव में एक किसान की गाय को अपना शिकार बना लिया। वन विभाग तेंदुए को पकड़ने में जुटा है।
5000 वर्ग किलोमीटर में फैले दुधवा-पीलीभीत क्षेत्र में चार महत्वपूर्ण रिजर्व हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी 30 से बढ़कर 65 हो गई है। एक तरफ तो इससे यूपी का गौरव बढ़ा है, तो दूसरी तरफ चिंता की बात यह है कि बाघों का ठिकाना अब गांव बनते जा रहे हैं।
विकास के नाम पर वन इलाकों को कम किया जा रहा है। इंसान बाघों के घर यानी जंगल में घुस रहे हैं। यही वजह है कि जंगल में लगातार इंसानी दखलंदाजी से बाघ आक्रामक हो रहे हैं। पूरे देश में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
सवाल यह है कि जानवर इंसानों की बस्ती में घुस रहे हैं या इंसान जानवरों के क्षेत्र को कब्जा रहे हैं।
*#KhabarZarooriHai: यूपी के सीतापुर के नारनी गांव में बाघ के घुसने से दहशत.. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को अब तक बाघ का सुराग नहीं
— Times Now Navbharat (@TNNavbharat) August 25, 2025
👉लाठी-डंडों के साथ पहरेदारी कर रहे हैं गांववाले
देखिए, सीतापुर से संवाददाता @mymanishkyकी रिपोर्ट@Sakshijournalis #UPNews #Sitapur #TigerTerror pic.twitter.com/i5TteiwZ1O
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