भारत-कनाडा रिश्तों में नई शुरुआत: उच्चायुक्तों की बहाली
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भारत और कनाडा ने एक साथ अपने-अपने नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति का ऐलान कर रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत दिया है.

हाल के सालों में खालिस्तान विवाद और राजनीतिक तनाव के चलते ठंडे पड़े संबंध अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटते दिख रहे हैं.

क्रिस कूटर भारत में कनाडा के उच्चायुक्त होंगे, वहीं दिनेश के. पटनायक कनाडा में भारत के उच्चायुक्त के तौर पर सेवाएं देंगे.

राजनयिकों की यह नियुक्ति सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारत और कनाडा रिश्तों में आई दरार को पीछे छोड़कर नई साझेदारी की ओर बढ़ना चाहते हैं.

ट्रूडो युग की छाया धीरे-धीरे हट रही है और दोनों देश अब व्यवहारिकता और साझा हितों के आधार पर आगे बढ़ते दिख रहे हैं.

रिश्तों की बहाली की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, क्योंकि दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद कई बार टूटने की कगार तक पहुंच गए थे.

2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था.

भारत ने कड़े कदम उठाते हुए कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित किया और वीजा सेवाएं तक रोक दीं.

द्विपक्षीय व्यापार और छात्र वीज़ा जैसे अहम क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ा.

लेकिन ट्रूडो के सत्ता से हटने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदलने शुरू हुए.

जी7 शिखर सम्मेलन (जून 2024) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्नी की मुलाकात में यह ठहराव तोड़ने और रिश्तों को फिर से बनाने पर सहमति बनी थी.

भारत ने साफ संदेश दिया है कि वह कनाडा के साथ रिश्तों को सामान्य करना चाहता है, लेकिन खालिस्तानी गतिविधियों पर कोई समझौता नहीं होगा.

नई नियुक्ति इस बात का संकेत है कि दिल्ली अब ओटावा के साथ संवाद बहाल करने को तैयार है.

कनाडा के लिए भारत सिर्फ एक रणनीतिक साझेदार नहीं बल्कि उसके सबसे बड़े प्रवासी समुदाय का घर भी है.

भारतीय छात्रों और पेशेवरों की बढ़ती संख्या कनाडा की अर्थव्यवस्था और समाज का अहम हिस्सा है. कार्नी सरकार इस नाराजगी को दूर कर रिश्तों को सुधारना चाहती है.

भारत और कनाडा दोनों की ज़रूरतें भी इस रीसेट को मजबूर कर रही हैं.

भारत उत्तरी अमेरिका में अपने आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना चाहता है.

कनाडा, अमेरिका और पश्चिमी साझेदारों के साथ तालमेल रखते हुए भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकता.

शिक्षा, निवेश और आपसी व्यापार, दोनों देशों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं.

रिश्तों की टाइमलाइन:

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