दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार का आज सुबह 3:30 बजे मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया. उनके निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि मनोज कुमार का असली नाम मनोज नहीं है? उनके तीन नामों की एक बेहद ही दिलचस्प कहानी है.
उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था. उनका जन्म एक पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था. विभाजन के दौरान, जब मनोज कुमार 10 साल के थे, तब वे अपने परिवार के साथ जंडियाला शेर खान (पाकिस्तान) से दिल्ली आ गए थे.
हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी अभिनेता दिलीप कुमार के बहुत बड़े प्रशंसक थे. 1949 में दिलीप कुमार की फिल्म शबनम देखने के बाद, वे उनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने फिल्म में दिलीप कुमार के किरदार के नाम पर अपना नाम बदलकर मनोज कुमार रख लिया.
इसके बाद, जब उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया, तो उन्हें छोटे-मोटे रोल ही मिलते थे. फिल्म फैशन में उन्होंने भिखारी का रोल निभाया था. कांच की गुड़िया में उन्हें पहली बार लीड एक्टर के तौर पर काम करने का मौका मिला.
मनोज कुमार को असली पहचान देशभक्ति वाली फिल्मों से मिली. शहीद में उनके काम को बहुत सराहा गया. सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों के जरिए उन्होंने देश की कई समस्याओं को उजागर किया.
क्रांति , उपकार और पूरब और पश्चिम जैसी फिल्मों में मनोज कुमार आम आदमी की आवाज बने. इन्हीं फिल्मों की वजह से उन्हें भारत कुमार का टाइटल मिला. महंगाई मार गई और है प्रीत जहां की रीत सदा जैसे गानों से उन्होंने राष्ट्रवाद को दर्शाया है.
1970 में आई फिल्म पूरब और पश्चिम का गाना भारत का रहने वाला हूं भारत की बात सुनाता हूं आज भी लोगों को याद है. उनका नारा मांग रहा है हिंदुस्तान रोटी, कपड़ा और मकान भी बहुत प्रसिद्ध हुआ था.
भारत के हृदय में ‘भारत कुमार’ सदैव अमर रहेंगे।
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) April 4, 2025
Manoj Kumar Ji embodied the spirit of Bharat and acted as one of India’s most dedicated cultural ambassadors. He took India’s civilisational values to the masses through some of his most iconic and popular cinematic jewels.
A… pic.twitter.com/Ey9eAHwcOY
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