विपक्ष की खुशी काफूर, वक़्फ़ बिल ने समर्थकों में भरा नया उत्साह: भाजपा संख्याबल को लेकर आश्वस्त, RSS का हिन्दू हित पर ज़ोर
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जून 2024 में लोकसभा चुनाव परिणाम आने पर कांग्रेस ने जश्न मनाया, मानो चुनाव जीत गई हो। 99 सीटों पर अटकी कांग्रेस ने भाजपा को 240 सीटों पर रोकना ही बड़ी सफलता मानी। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकप्रियता से ऐसा बेंचमार्क सेट किया कि कांग्रेस समझ ही नहीं पाई। 400 पार के नारे में विपक्ष उलझा रहा, और पीएम पद की शपथ मोदी ने ली।

मीडिया में बहस छिड़ी कि मोदी सरकार के कोर एजेंडों का क्या होगा- वक़्फ़ बोर्ड में सुधार, UCC, मुस्लिम आरक्षण ख़त्म करना, और वर्शिप एक्ट में बदलाव। भाजपा ने लोकसभा और राज्यसभा में वक़्फ़ बिल पारित कराके दो बातें साफ़ कर दी हैं।

भाजपा संख्याबल को लेकर निश्चिंत है और अपने कोर एजेंडे से हटने वाली नहीं है। उसके पास बदलावों के लिए संख्याबल है। दूसरे कार्यकाल में पार्टी ने राम मंदिर निर्माण, जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35A निरस्त करने, और CAA जैसे फैसले लिए। किसान सुधार बिल ज़रूर वापस लिया गया, लेकिन वो हिंदुत्व या राष्ट्रवाद वाले एजेंडे का हिस्सा नहीं था।

वक़्फ़ संशोधन विधेयक पहले संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया, फिर लोकसभा में 288-232 और राज्यसभा में 128-95 के बहुमत से पारित कराया गया। जदयू और TDP जैसे दलों ने भी भाजपा का साथ दिया, जबकि ये सेक्युलर छवि बनाए रखते हैं। चिराग पासवान की LJP और जीतन राम माँझी की HAM भी सरकार के साथ खड़ी रहीं। नवीन पटनायक ने BJD सांसदों को भी स्वतंत्र कर दिया।

वक़्फ़ बिल पास कराने से पहले सदनों में गहन चर्चा हुई और वोटिंग प्रक्रिया रात 1 बजे पूरी हुई। गृह मंत्री अमित शाह रात भर डटे रहे, और किरेन रिजिजू बिल के प्रावधानों को समझाते रहे। पीएम मोदी थाईलैंड में BIMSTEC की बैठक में थे, जिससे पता चलता है कि भाजपा संख्याबल को लेकर आश्वस्त थी।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने की चेतावनी दी, और प्रधानमंत्री मोदी 11 वर्षों में पहली बार RSS मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने संघ के संस्थापक हेडगेवार और गोलवलकर की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जिससे संघ के साथ अपनी नज़दीकी दिखाई।

उत्तराखंड में UCC लागू किया जा चुका है। मुस्लिम आरक्षण ख़त्म करने में भाजपा को परेशानी आ सकती है, लेकिन ये बिहार विधानसभा चुनाव और नीतीश कुमार के स्वास्थ्य पर निर्भर करेगा। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने रामनवमी को प्रतिष्ठा का विषय बनाया है।

संसद में अमित शाह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ 2027 में CM के रूप में रिपीट होंगे। हाल ही में मथुरा में हुई भाजपा-संघ की बैठक में RSS ने हिन्दू हितों का ध्यान रखने की बात कही। स्वयंसेवकों को काशी और मथुरा में सक्रिय रहने की सलाह दी गई है।

विपक्ष हिन्दुओं को बाँटने की साजिश रचकर थक चुका है। राहुल गाँधी जातीय जनगणना की बात करते हैं, अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला जातिवाद पर आधारित है, लेकिन भाजपा का जनाधार कमजोर नहीं हुआ है।

मोदी बनाम Who का जवाब देने वाले समर्थक भी निराश हो चुके हैं, क्योंकि पिछले चुनावों में I.N.D.I. गठबंधन आपस में ही लड़ बैठा। बिहार में राजद और कॉन्ग्रेस के बीच रार चल रही है। भाजपा के लिए ये आदर्श स्थिति है। महाकुंभ 2025 के बाद हिंदुत्व एक बार फिर मुख्यधारा की राजनीति में वापसी कर चुका है।

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