चीन के 5000 जहाजों के मुकाबले भारत के 500: कैसे होगी प्रतिस्पर्धा?
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भारत के शिपिंग उद्योग को तत्काल सुधार की जरूरत है, क्योंकि यह समुद्री व्यापार में चीन से बहुत पीछे है। वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इस विषय पर चिंता जताई है।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में चीनी जहाजों का दबदबा है। दुनिया के 98 प्रतिशत व्यापारिक जहाजों को या तो चीन की कंपनियां चलाती हैं, या वे चीन में बने जहाजों का इस्तेमाल करती हैं।

दुनिया की 20 सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों के बेड़े में 30 प्रतिशत जहाज मेड इन चाइना हैं। चीन के पास 5000 से अधिक बड़े कमर्शियल जहाज हैं, जबकि भारत के पास 500 से भी कम।

अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत को इस अंतर को पाटने के लिए मिलकर काम करना होगा और अपने रणनीतिक हितों के लिए पूरी ताकत लगानी होगी।

1999 में ग्लोबल शिपबिल्डिंग मार्केट में चीन की हिस्सेदारी महज 5 प्रतिशत थी, जो 2023 तक बढ़कर 50 फीसदी हो गई। जनवरी 2024 में कमर्शियल वर्ल्ड फ्लीट में चीन की हिस्सेदारी 19 फीसदी से अधिक है।

भारत, जो अभी समुद्री ताकत के मामले में 16वें नंबर पर है, का लक्ष्य 2030 तक टॉप 10 जहाज बनाने वाले देशों में शामिल होना और 2047 तक टॉप 5 में आना है। भारत शिपिंग में अपनी धाक जमाने के लिए कई योजनाएं शुरू कर रहा है।

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