बिना इनकम शादी? जज का अजीबोग़रीब फरमान, सोशल मीडिया पर मचा बवाल!
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शादी और आर्थिक स्थिति का गहरा नाता सदियों से जुड़ा रहा है. खासकर भारत में, दूल्हे की वित्तीय स्थिरता को सामाजिक प्रतिष्ठा का पैमाना माना जाता है. इसी पृष्ठभूमि में, एक वायरल वीडियो ने नई बहस छेड़ दी है.

वीडियो में, एक जज एक व्यक्ति से उसकी आर्थिक स्थिति पर सवाल कर रहे हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिना स्थायी आय वाले पुरुष को शादी करने का अधिकार है?

कोर्टरूम में जज और उस व्यक्ति के बीच हुई बातचीत इस प्रकार है:

जज: तुम्हारे पास नौकरी नहीं है? व्यक्ति: नहीं, सर. मैंने लिखा था कि जब भी मुझे बुलाया जाता है, मैं डॉक्टर की सेवा देने जाता हूं. जज: जब उन्होंने प्रीएम्पशन (Preemption) किया, तो वह पूरी तरह से गलत था. तुमने अपनी आय के बारे में क्या कहा था? व्यक्ति: सर, मैंने कहा था कि अभी मेरे पास नौकरी नहीं है. जब मुझे बुलाया गया, मैंने लिखा था कि मेरे पास नौकरी थी. जज: तुम डॉक्टर हो. तुम्हें शादी करने का कोई हक नहीं है. केवल वकीलों को बिना आय के शादी करने का अधिकार है. एक डॉक्टर को यह अधिकार नहीं है. अगर तुम्हारी आय नहीं थी, तो तुमने शादी क्यों की?

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग भड़क गए हैं. इस पर जमकर बहस हो रही है. कुछ लोग जज के बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कई इसे अन्यायपूर्ण और पक्षपाती बता रहे हैं.

एक यूजर ने लिखा, जज महोदय, यह अजीब है कि कोर्ट पुरुष की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है, लेकिन महिला से नहीं पूछ रहा कि उसने बिना आय वाले व्यक्ति से शादी क्यों की? क्या दोनों की जिम्मेदारियां समान नहीं होनी चाहिए?

एक अन्य यूजर ने पूछा, क्या दुनिया के किसी भी देश में ऐसा कोई कानून है जो पुरुष को शादी करने के लिए स्थायी आय की शर्त रखता है?

कुछ लोगों ने इस विचार का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत शादी के लिए आय अनिवार्य हो. उन्होंने सवाल किया कि अगर शादी के समय कोई व्यक्ति कमा रहा था, लेकिन बाद में उसकी आय बंद हो गई, तो क्या वह अपराधी बन जाएगा?

लोगों ने यह भी तर्क दिया कि अगर जज ऐसा सवाल कर रहे हैं, तो उन्हें यह भी पूछना चाहिए कि पत्नी ने बिना आय वाले व्यक्ति से शादी क्यों की?

यह विवाद केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शादी, लिंग आधारित भूमिका, आर्थिक अपेक्षाओं और समाज में पुरुषों और महिलाओं से जुड़ी मान्यताओं को लेकर एक बड़ी बहस शुरू हो गई है.

आर्थिक स्थिरता निश्चित रूप से एक सफल शादी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसे कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जाना चाहिए या यह केवल समाज की एक अपेक्षा मात्र होनी चाहिए? इस सवाल का जवाब तलाशना जरूरी है.

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