संसद में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सभी सवालों का सिलसिलेवार जवाब दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ को एक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में परिभाषित किया गया है, जहाँ लोग वक्फ के लिए अपनी जमीन दान करते हैं.
अमित शाह ने जोर देकर कहा कि सरकारी संपत्ति का दान नहीं हो सकता. केवल वही जमीन दान की जा सकती है जो व्यक्ति की अपनी हो. उन्होंने विपक्ष पर देश को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि वक्फ में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने वक्फ में पैसों की चोरी के कई उदाहरण भी दिए. उन्होंने बताया कि 2014 में चुनाव के दौरान रेलवे की भूमि को वक्फ के नाम पर घोषित कर दिया गया, और कई गांवों पर भी वक्फ ने कब्जा कर लिया. तमिलनाडु में एक 1500 साल पुराने मंदिर की जमीन पर भी वक्फ ने कब्जा कर लिया था.
अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि वक्फ में कोई गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होगा. उन्होंने बताया कि वक्फ अधिनियम और बोर्ड 1995 में लागू हुआ था. धार्मिक मामलों में गैर-मुस्लिमों की कोई भूमिका नहीं होगी. धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने वालों में किसी भी गैर-मुस्लिम को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है और सरकार ऐसा नहीं करना चाहती.
उन्होंने इस धारणा को गलत बताया कि यह अधिनियम मुसलमानों के धार्मिक आचरण या उनके द्वारा दान की गई संपत्ति में हस्तक्षेप करेगा. उन्होंने कहा कि यह गलत धारणा अल्पसंख्यकों में अपने वोट बैंक के लिए डर पैदा करने के लिए फैलाई जा रही है.
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि वक्फ, जो मुस्लिम भाइयों द्वारा धार्मिक गतिविधियों के लिए दान के माध्यम से बनाया गया एक ट्रस्ट है, उसमें सरकार द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा. मुतवल्ली उनके समुदाय से होगा, वाकिफ उनका होगा और वक्फ भी उनका होगा.
गृह मंत्री ने कलेक्टर को अधिकार दिए जाने पर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया. उन्होंने पूछा कि जब किसी मंदिर को जमीन अधिग्रहण करने की ज़रूरत होती है, तो ज़मीन का स्वामित्व कौन तय करता है? उन्होंने कहा कि कलेक्टर ही तय करता है. राजस्व अधिकारी ऐसे मामलों के लिए जिम्मेदार होता है. इसलिए, अगर यह सवाल है कि जमीन का कोई टुकड़ा वक्फ का है या नहीं, तो कलेक्टर को इसकी पुष्टि क्यों नहीं करनी चाहिए?
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संसद का कानून है और सभी को इसे स्वीकार करना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड की जमीन में गड़बड़ी हुई है. आंकड़ों के अनुसार, 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड के पास 18 लाख एकड़ जमीन थी, जो 2013 से 2025 तक बढ़कर 39 लाख एकड़ हो गई. उन्होंने सवाल उठाया कि किसकी इजाजत से यह जमीन बेची गई. अमित शाह ने यह भी बताया कि केरल और देश के चर्चों ने इस बिल का समर्थन किया है.
वक्फ में कोई गैर इस्लामिक सदस्य आएगा ही नहीं : वक्फ बिल पर बोले गृह मंत्री अमित शाह#WaqfBill | #WaqfAmendmentBill | #AmitShah pic.twitter.com/S3iWARDSED
— NDTV India (@ndtvindia) April 2, 2025
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