बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चीन पहुंचकर जो बयान दिया है, वह भारत के लिए शर्मनाक है। यूनुस ने चीन की धरती पर भारत की मजबूरियां गिनाईं और बांग्लादेश को इस क्षेत्र के समुद्र का एकमात्र बादशाह बताया।
यूनुस का बयान भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा है। उन्होंने चीन में कहा कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य, जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता है, चारों ओर से भूमि से घिरे हुए हैं और उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है।
भारत को अब बांग्लादेश को सबक सिखाने की जरूरत है। पाकिस्तान को जब भारत जवाब दे सकता है, तो बांग्लादेश को क्यों नहीं? उरी और पुलवामा के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक ने पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी है।
1971 में जब भारत ने बांग्लादेश बनाने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्यवाही शुरू की थी, उस समय स्थितियां अनुकूल नहीं थीं। फिर भी भारत ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांटने में सफलता पाई थी।
यूनुस ने बीजिंग में कहा कि भारत के पूर्वोत्तर की भूमि से घिरी प्रकृति के कारण बांग्लादेश इस क्षेत्र में समुद्र का एकमात्र संरक्षक है। उन्होंने कहा कि भारत के सात राज्य भारत के लैंड लॉक्ड क्षेत्र हैं और उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने भी यूनुस के बयान पर सवाल उठाया। बांग्लादेश में भारत की उपायुक्त रह चुकीं बीना सीकरी का कहना है कि मोहम्मद यूनुस जैसे लोग जमाते इस्लामी से जुड़े रहे हैं और उन्हें भारत को लेकर हमेशा से दर्द रहा है।
बांग्लादेश के खिलाफ एक्शन लेने के लिए भारत के पास मौका भी है। भारत के करीब सभी राजनीतिक दल मोहम्मद यूनुस और बांग्लादेश के खिलाफ बयान दे रहे हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यूनुस के बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है। टिपरा मोथा पार्टी के चीफ प्रद्योत माणिक्य का कहना है कि भारत की सबसे बड़ी गलती 1947 में चटगांव बंदरगाह को छोड़ना था। उन्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेश को तोड़कर अपनी समुद्री पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी मोहम्मद यूनुस के बयान की निंदा करते हुए क्षेत्र में चीन के लगातार बढ़ रहे प्रभाव के खतरों को लेकर चेतावनी दी।
*Time for india to make a route to the ocean by supporting our indigenous people who once ruled Chittagong so we are no longer dependent on an ungrateful regime . India’s biggest mistake was to let go of the port in 1947 despite the hill people living there wanting to be a part… pic.twitter.com/IhyFbTZDQ3
— Pradyot_Tripura (@PradyotManikya) March 31, 2025
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