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वर्तमान केंद्र सरकार में यदि मेहनत और प्रतिबद्धता की बात की जाए तो प्रभु ही याद आते हैं , जी हाँ रेल मंत्री सुरेश प्रभु । मोदी सरकार के विश्वास पात्र नगीनों में से एक नाम हैं सुरेश प्रभु। जिन्हें मीडिया ने तो कोई स्थान दिया नहीं , मगर वे अपने प्रयासों से नागरिकों के दिल में जगह जरूर बनाते जा रहे हैं । रेलवे में सफर करने वाले लोग अपने मंत्री के प्रयासों को अनुभव भी कर रहे हैं और जता भी रहे हैं । भारत के इतिहास में शायद ही कोई रेल मंत्री अपने यात्रियों से इतना जुड़ पाया हो जितना सुरेश प्रभु जुड़ चुके हैं । वे अपने रेलवे और रेल यात्रियों से जिस तरह संपर्क में रहते हैं वह एक आदर्श शासन व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है।

कहते हैं बदलाव पलक झपकते नहीं आता, मगर आपके प्रयास दिखने तो चाहिए ; अपने पहले बजट के एक साल के भीतर प्रभु ने रेलवे की काया पलट की जो कोशिशें की हैं वे अब नज़र आने लगी हैं

रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए जापान और कोरिया सहित कई देशों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाया जा रहा है, साथ ही 14 जोन में 29 रेलवे वर्कशॉपों के आधुनिकीकरण कार्यों को मंजूरी दी गई है।

लोगों की शिकायत गंदे टॉयलेट्स को लेकर थी , जिन्हें स्वछता अभियान के तहत साफ़ और सुविधाजनक बनाया जा रहा है , तथा नए तरह के टॉयलेट्स का निर्माण भी किया जा रहा है ।

वातानुकूलित कोचेस को और भव्य बनाने के लिए इंडियन फैशन इंस्टिट्यूट की सहायता से निर्माण चल रहा है ।

तथा सामन्य श्रेणी के कोचेस को सुविधाजनक बनाने के लिए नया इंटीरियर बनाया जा रहा है ।

सिर्फ इतना ही नहीं , रेलवे रोलिंग स्टाक वर्कशॉप के आधुनिकीकरण और नई प्रौद्योगिकी को शामिल करने का काम कर रही है। इसमें रोबोटिक वेल्डिंग मशीन, लेजर कटिंग और वेल्डिंग आदि शामिल है।

आधुनिक इस्पात आधारित वैगन, कोच का निर्माण तथा मरम्मत कार्य के लिए वर्कशॉप को आधुनिक बनाने के लिए उपकरणों को शामिल करने की पहल की गई है।

रेल मंत्री ने कहा है कि रेलवे के आधुनिकरण के लिए जापान, कोरिया समेत कई देशों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाया जा रहा है। जापान के साथ हाल ही में सहयोग केवल बुलेट ट्रेनों तक सीमित नहीं है बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी सहयोग किया जा रहा है क्योंकि जापान में सबसे कम रेल दुर्घटनाएं होती है। इसी तरह से कोरिया के साथ भी रेलवे के क्षेत्र में सहयोग किया जा रहा है । नए और आधुनिक कोचों के इसी वर्ष में आने की संभावनाएं हैं, यदि ऐसे ही प्रयास निरंतर किये गए तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश उन्नत रेल सेवाओं से लैस होगा ।

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