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हम अक्सर फिल्मों देखते हैं, कि नायक पुलिस वाला बनकर आता है और समाज के लिए पूरी प्रतिबद्धता से लड़ता है; वह जैसे अपराध से लड़ता है वैसे ही सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार को भी खत्म करने का बीड़ा उठता है; मगर तीन घंटे खत्म होते ही वह नायक भी खत्म हो जाता है , और अपराध , सिस्टम , भ्र्ष्टाचार सब अपनी अपनी जगह जस के तस बने रहते हैं ।

वास्तविक जगत में वे नायक नहीं आते , और हर नागरिक अपनी दशा ,अन्याय , भ्र्ष्टाचार और उत्पीड़न से जैसे जूझता आ रहा था वैसे ही जूझता रह जाता है । ऐसे में अगर हम आपसे कहें कि भारत में अब भी ऐसे नायक सचमुच पाये जाते हैं तो आपको शायद ही यकीन हो; मगर ये सच है । आइये जानते हैं कौन है वो नायक और क्या कारनामा किया उसने ।

घटना ये है कि रात 11 बजे की, जब लगभग सारा पटना सोने की तैयारी कर रहा था तभी चेहरे पर गमछा, पैर में चप्पल व टूटी साइकिल पर सवार एक शख्स आर ब्लॉक चौराहे पर खड़ी पुलिस जिप्सी के पास पहुँचा । जीप में बैठे इंस्पेक्टर से फरियाद की कि साहब मैं मध्यप्रदेश का निवासी हूँ और पटना में ही रहता हूँ, मजूरी करके लौट रहा था और बदमाशों ने मेरा सारा पैसा लूट लिया ।

इंस्पेक्टर ने बात सुनी अनसुनी करके कहा कि चल भाग यहां से। लेकिन वह व्यक्ति बार-बार मनुहार करता ही रहा, इंस्पेक्टर ने फिर से हड़काया और जाने को कहा, मगर वह व्यक्ति फिर भी मदद की गुज़ारिश करता रहा, जिससे झल्लाया इंस्पेक्टर गालियां देते हुए जीप से उतरा और उस आदमी के पास पंहुचा, इंपेक्टर ने उस मज़दूर पर थप्पड़ मारने के लिए हाथ ताना ही था कि मज़दूर ने अपने चेहरे से गमछा हटा दिया, मज़दूर का चेहरा देखते ही इंस्पेक्टर के पैरों तले जमीन खिसक गई। भयंकर सर्दी में भी इंपेक्टर पसीने छोड़ गया, वो कुछ कह पता इससे पहले मज़दूर ने कहा "यू आर सस्पेंडेड मिस्टर विपिन कुमार" ।

वो मज़दूर कोई और नहीं पटना के युवा एसएसपी IPS मनु महाराज थे, जो पूरे पटना के सो जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था का जायदा लेने निकले थे ।हालांकि आपको ये कहानी पूरी तरह फ़िल्मी लग रही होगी, मगर यकीन मानिए ये घटना एक दम सच है ।मनु महाराज को अकसर ये शिकायतें मिलती रहती हैं कि उनके पदाधिकारी अपने काम के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। लेकिन इन शिकायतों पर वह तब तक कार्रवाई करना उचित नहीं समझते थे जब तक कि खुद ऐसे अधिकारी को रंगे हाथ न पकड़ लें। मनु महाराज की जनता के लिए प्रतिबद्धता के चर्चे पूरे पटना में मशहूर हैं, सिंघम जैसा लुक रखने वाले मनु कई युवाओं के आदर्श हैं ; उनकी छवि एक सख्त पुलिस अधिकारी की है। कहते हैं, वे अक्सर रात को वेश बदल कर अपने शहर की रक्षा किया करते हैं । मनु महाराज का अपराध और व्यवस्था पर नियंत्रण काफी अच्छा है । हालांकि इस घटना को वक़्त हो गया मगर आज बिहार को मनु जैसे अधिकारियों की जरूरत है । बिहार के वर्तमान हालात जगजाहिर हैं , मगर यदि मनु महाराज जैसे कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी हर शहर में हों, तो बिहार में अपराधियों के हौसले पस्त होते देर नहीं लगेगी ।

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