फटाफट TOP 10: आज की 10 बड़ी खबरें
जब एक फोटो ने कारण मायावती ने काट दिया टिकट
क्या हुआ जब मज़दूर को दुत्कार कर भगाया इंस्पेक्टर ने : रियल लाइफ का सिंघम
नहीं है छत, नहीं है दीवारें, बस खून-पसीने की मेहनत और खड़ा किया देश का सबसे अनूठा स्कूल
जब IAS अधिकारी का पद छोड़ अध्यापक बन गया 24 साल का युवक
इस गाँव में होती है अफसरों की फसल :
नए साल की धमाकेदार शुरुआत, हुआ पहला घोटाला :जानिये कौन है ये नया लुटेरा
बदलने लगी है भारतीय रेलवे की तस्वीर : ऐसे होंगे नए कोच
इसलिए सेक्स से डरती हैं लडकियां
क्या किसी देश की राष्ट्रपति इतनी हॉट हो सकती है?
पठानकोट हमले का खुलासा किसने लगाई सुरक्षा में सेंध ?
और फिर हम कहते हैं कि सरकार काम नहीं कर रही : क्या इस तरह आएंगे अच्छे दिन?
जब ऑड ईवन फार्मूले पर निकला एक दिल्ली वाले का दर्द : जानिये क्या क्या कहा
पैन कार्ड नहीं है तो हो जाएँ आज से सावधान
हैवानियत का चरम : क्या हुआ ISIS के चंगुल से भागी इन दो लड़कियों के साथ
नीच ISIS का एक और कुकृत्य हुआ उजागर: दासियों से बलात्कार के भी बनाये नियम
न्यू ईयर पार्टी में जाने से पहले जरूर रखें इन बातों का ख्याल
साल 2015: क्या क्या हुआ दुनिया भर में: Special Report News75
इस फिल्म में सनी लीओन ने दिखाया अपना फुल पोर्न रूप , दिए जमकर न्यूड सीन
साल भर में जनता को क्या दिया मोदी ने - डिजिटल लॉकर से स्मार्ट सिटी तक, News75 Special, साल 2015
`निर्भया` के हत्यारे को नहीं है कोई भी अफ़सोस

जेहन को झखझोर देने वाली 16 दिसंबर 2012 की वो खबर आज तक हर नागरिक को चुभती है , मगर आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि `निर्भया` के साथ सबसे क्रूर अत्याचार करने वाले नाबालिग ` दरिंदे मोहम्मद अफ़रोज़ ` को इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है | आपको मालूम होगा कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उस दरिंदे को बीते रविवार रिहाई दे दी गयी है | मगर जिस सुधार गृह में वह रहा है वहां के स्टाफ का कुछ और ही कहना है | सुधार गृह के कर्मचारियों के मुताबिक़ अपराधी के चेहरे पे हमेशा एक घृणित चुप्पी ही रही , न तो उसे अपने किये का कोई अफ़सोस रहा और ना ही कोई संवेदना जो अन्य बाल अपराधियों में होती है | जब वह अपराधी बना था तब उसकी उम्र साढ़े 17 साल थी अब वह 21 का हो चुका है | जिन लोगों ने उसे बड़ा होते देखा है उनका कहना है कि वह एक बड़ा अपराधी बन सकता है |

सुधार गृह के मोविज्ञानिकों का भी मानना है कि जिस तरह की पृवत्ति अफ़रोज़ की है वह समाज में आज़ाद नहीं रखा जा सकता है | मनोचिकित्सकों की मानें तो अफ़रोज़ के खतरनाक होने का प्रमाण इस बात से मिल जाता है , कि सुधार गृह में कोई भी बच्चा उससे दोस्ती नहीं रखना चाहता था | इतना ही नहीं कॉउन्सिलिंग के दौरान भी वो मनोचिकित्सकों से यही कहता था कि मैं अकेला रहना चाहता हूँ | ये सभी बातें भविष्य में अन्य लड़कियों के लिए कितनी खतरनाक हो सकती हैं, इस पर विचार शायद उन लोगों ने नहीं किया होगा जो उसकी रिहाई के पक्ष में हैं |

सुधार गृह के अन्य बालकों का भी यही कहना है, कि वह न तो साहित्य के प्रति कोई लगाव रखता था और न ही उसे सुधार गृह में अपने बंदी होने का कोई पछतावा था | वह बेफिक्र खाता , घूमता और सोता था | उसकी अम्मी उससे निरंतर मिलने आती थीं , जिससे वह काफी बातें किया करता था | सुधार गृह के अधिकारी उसे उसके गाँव में वापस भेजने को लेकर शंकित हैं, वहीं उसके निडर और कॉन्फिडेंट स्वाभाव ने कई सवालों को जन्म दे दिया है |

मोहम्मद अफ़रोज़ वही है जिसने रॉड से पीड़ित की हत्या की थी | और उसके बेशर्म वकीलों ने वयस्क होने में छः महीने की कमी को मुद्दा बना कर , उसे अपराधी से बाल अपराधी घोषित करवा दिया | हैरत की बात ये है कि अफ़रोज़ की वकील एक महिला है | मोहम्मद अफ़रोज़ समाज में किस रूप में दाखिल होगा, आगे क्या क्या करेगा इस पर भी न्यायालय ने पर्दा डाल दिया है| अफ़रोज़ का चेहरा किसी ने नहीं देखा , ऐसे में आम जनमानस उससे सावधान भी नहीं रह सकता | वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दरिंदे अफ़रोज़ को एक सिलाई की मशीन और दस हज़ार रुपये देने का एलान किया है | न्यायालय अपनी जगह खड़े हैं , राजनीति अपनी जगह कायम है, बस संवेदनाओं का ही शायद इस माहौल में कोई स्थान नहीं |

प्रतिक्रिया दीजिए