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क्या दिल्ली सचिवालय में सीबीआई के हाथ कुछ और भी लगा है? इतना क्यों बौखलाए केजरीवाल ?

केजरीवाल भले ही कितने आरोप लगा लें कि सीबीआई ने उनके निजी दफ्तर पर छापा मारा है, ये बात किसी को हज़म नहीं हो रही , कि सीबीआई ने मुख्यमंत्री दफ्तर पर छापा मारा और किसी भी CCTV में ये रेड रिकॉर्ड नहीं हो सकी | स्टिंग क्रांति की शुरुआत करने वाले केजरीवाल अभी तक ये सिद्ध नहीं कर पाये हैं, कि उनके दफ्तर पर छापा पड़ा है | हालांकि उन्होंने खुद को घिरता देख DDCA का नया शिगूफा मीडिया में छोड़ दिया है| ऐसा लगता है केजरीवाल जनता और मीडिया दोनों को बेवकूफ समझते हैं |

अंदरखाने के हवाले से आयी एक खबर यदि सच है तो ये ड्रामा खुद केजरीवाल को महंगा पड़ सकता है | केजरीवाल का कहना था कि यदि उनके सचिव पर लगे आरोप सही भी थे तो भी पहले उन्हें अवगत कराना था | जबकि केजरीवाल को कुमार पर लगे आरोपों की सूचना बहुत पहले भेजी जा चुकी थी : ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (टीआई ) ने केजरीवाल को इसी साल मई में एक पत्र लिखा था। इस पत्र में टीआई ने केजरीवाल को कुमार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में अवगत कराया था । आश्चर्य की बात यह है कि केजरीवाल की ओर से इस पत्र का कोई प्रतिउत्तर नहीं दिया गया था। टीआई के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आशुतोष शर्मा ने पत्र भेजे जाने की पुष्टि की है। इस पत्र की कॉपी पीएम और प्रेसिडेंट के साथ ही सीवीसी को भी भेजी गई थी। इतना ही नहीं गृहमंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया गया कि माननीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीबीआई से आशा की थी कि जब तक आवश्यक न हो और पुख्ता सबूत न हो , छापा न मारा जाए | सभी तरह संतुष्ट होने के बाद ही सीबीआई ने रेड का निर्णय लिया था |

ऐसे में संदेह ये उठता है कि अरविन्द " छापे की पूर्व सूचना " क्यों चाहते थे ? क्या विदेशी करेंसी के अलावा ऐसा कुछ और भी सचिवालय में था जिसे पूर्व सूचना मिलते ही हटा देने की योजना थी ? क्या सीबीआई को राजेन्द्र कुमार से सम्बंधित सबूतों के अलावा भी कुछ हाथ लगा है ? अरविन्द केजरीवाल की भयानक बौखलाहट तो इस बात की पुष्टि कर देती है |

इसके अलावा एक और तथ्य चौंकाने वाला है राजेंद्र कुमार पर CBI कार्रवाई के पीछे आशीष जोशी नाम के एक शख्स हैं। आशीष दिल्ली डायलॉग कमीशन के मेंबर थे। आप सरकार ने उन्हें टर्मिनेट किया था। बाद में जोशी ने दिल्ली सरकार की ही ACB में कुमार की शिकायत की थी। फिर भी कुमार पर कोई कार्यवाही नहीं हुई | कुछ अफवाहें इस सचिवालय से मिली सामग्री को पंजाब चुनाव से भी जोड़ रही हैं | अब और क्या क्या राज़ हैं , ये तो वक़्त आने पर पता चले मगर इस बहाने कांग्रेस को संसद ठप करने का एक बहाना और मिल गया है |

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